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लघु–फिल्में —
" महाकवि जयशंकर प्रसाद ट्रस्ट द्वारा निर्देशित और प्रस्तुत लघु–फिल्में केवल चलचित्र नहीं, बल्कि गहन संवेदना, सांस्कृतिक चेतना और मानवीय भाव–जगत की अद्भुत कलात्मक अभिव्यक्तियाँ हैं। प्रत्येक फिल्म इस सहज उद्देश्य से रची गई है कि प्रसाद जी की कालजयी विचारधारा—जहाँ साहित्य, करुणा, मानवीय संवेदनशीलता और सौंदर्य का आंतरिक आलोक एक साथ प्रवाहित होता है—समकालीन दर्शकों तक सजीव रूप में पहुँच सके।
लघु–फिल्मों की विषय–वस्तु मानवीय जीवन के उन शाश्वत अनुभवों को उभारती है, जो हम सभी की रोजमर्रा की भाव–यात्रा का हिस्सा हैं—आशा, त्याग, मनोबल, सामाजिक समरसता, प्रेम, संघर्ष और आत्म–संधान। कथानक की मार्मिकता, कलाकारों की अभिव्यक्ति, और दृश्य–सौंदर्य की सघनता मिलकर ऐसा भाव–जगत रचती हैं, जो दर्शकों के हृदय में उतरकर लंबे समय तक एक शांत, परंतु गहरा स्पंदन छोड़ जाती है।
ये फिल्में मनोरंजन से कहीं अधिक हैं—ये जागृति का माध्यम हैं, संवेदना का संचार हैं, और उस दृष्टि का विस्तार हैं जिसके द्वारा मनुष्य जीवन को अधिक करुणामय, सौम्य और समझदार बनाकर देख पाता है। विशेष रूप से युवा सर्जकों के लिए यह एक महत्त्वपूर्ण मंच है, जो उन्हें सार्थक विचारों, सांस्कृतिक मूल्यों और साहित्यिक सौंदर्य को समाज तक पहुँचाने का अवसर प्रदान करता है।
इन रचनात्मक प्रयासों के माध्यम से ट्रस्ट न केवल प्रसाद जी की कलात्मक विरासत का संरक्षण करता है, बल्कि नई पीढ़ी में उन गहन भाव–सत्यताओं के प्रति एक नयी संवेदना, नयी चेतना और नयी दृष्टि भी जगाता है। "
Shiv Ratneshwar Mahadev: "PRASAD MANDIR"
महाकवि जयशंकर प्रसाद तीर्थ-स्थल | प्रसाद मंदिर, गोवर्धन सराय, चेतगंज वाराणसी
Mahakavi Jaishankar Prasad Pilgrimage Site | Prasad Temple, Govardhan Sarai, Chetganj, Varanasi
"Ganapateshwar Mahadev" built by Prasad's ancestors: Tedi Neem, Hoj Katora, Godaulia, Varanasi
प्रसाद साहित्य भारतीय नवजागरण का उज्जवल स्वर, जोकि नए भारत, नए मनुष्य और नए समाज की प्रेरणा है
Prasad's literature is a shining voice of the Indian Renaissance, which inspires a new India, a new man, and a new society.
शुभारंभ के गौरवमयी मनोहारी दृश्य |महाकवि जयशंकर प्रसाद साहित्य-संस्कृति महोत्सव, संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय
Glorious and captivating scenes from the inauguration ceremony | Mahakavi Jaishankar Prasad Literature and Culture Festival, Sampurnanand Sanskrit University
कामायनी और भारत की अस्मिता - साहित्यकार राधा वल्लभ त्रिपाठी और विजय बहादुर सिंह कवि, लेखक व आलोचक
Kamayani and the Identity of India - by literary figures Radhavallabh Tripathi and Vijay Bahadur Singh, poet, writer and critic.
विश्व हिंदी परिषद | अंतरराष्ट्रीय हिंदी सम्मेलन, नई दिल्ली
World Hindi Council | International Hindi Conference, New Delhi